अच्छा इंसान बने रहना, आपके डिप्रेशन का कारण तो नहीं… !

बहुत अच्छा इंसान होना, बहुत ही अच्छी बात है.

पर बहुत अच्छा इंसान बने रहने के लिए आपका अधिक त्याग करना, अधिक केयरिंग होना जरूरी होता है.

अच्छा इंसान बने रहने के लिए अपने डिप्रेशन को काबू में रखते हुए लोगों के स्वीकृति हासिल करना, हमेशा इस बात का ध्यान रखना की कहीं कोई आप से नाराज़ ना हो जाए…  इसके लिए आपका लोगों के प्रति अधिक झुकाव का होना जरूरी होता है.

है न !

फिर भी, विडंबना यह है कि, अक्सर आपके कार्यों को दूसरों द्वारा स्वार्थी और आत्म-केंद्रित के रूप में देखा जाता है. दशकों तक मैं अच्छे इंसान बने रहने वाली  बकवास पर विश्वास करता रहा. मुझे ऐसा लगता था कि मैं स्वार्थी और खुद को अपने आप तक ही सिमित रखने वाला इंसान हूँ. मुझे यकीन था कि मुझमे ऐसा कुछ भी नहीं है जो किसी को कुछ भी दे सकूँ. मुझे लगता था कि मेरे कुछ भी सोचने का कोई फर्क नहीं पड़ता. मेरी राय किसी और की तुलना में कम महत्वपूर्ण है. ऐसा लग रहा था जैसे मैं हमेशा किसी और के जीवन जी रहा हूं.

अंत में, कई मानसिक आघात के बाद मैं किसी और की ज़िन्दगी जीना छोड़कर, खुद को टटोलना शुरू किया.

मुझे याद है, मेरा झुकाव हर उस व्यक्ति के प्रति होने लगा था, जिसे मुझमे कुछ भी अच्छा लगता था. उन दिनों मुझे लगता था कि मेरा महत्व बस इतना ही है जितना लोग समझते हैं.

अपने आप में मैं कुछ भी नहीं था. मैं सिर्फ एक ग़ुलाम था, जिसे मुझसे कुछ भी जरूरत हो मैं उसके काम आ सकूँ. समाज से रिजेक्शन का डर मेरी सोंच पे हावी रहा और इसका फायदा लोगों ने खूब उठाये.

सोचिये कितना थकाऊ वो दिन रहें होंगे ! जब मैं महज़ सबको खुश रखने के लिए हर वक़्त लोगों के सामने खुद को हाजिर रखता था. ये सब सिर्फ इसलिए कि  खुद को लगे कि लोगों को मेरी जरुरत है. खुद को महत्वपूर्ण महसूस करता था कुछ पल के लिए ही सही.

 

पर उसके बाद क्या ! जब किसी का काम निकल जाए और वो खुद से दूर करदे ? कोई भी मुझसे बात नहीं करता था. जाहिर है उस वक्त खुद को दोषी मानता था कि मैं किसी भी लायक नहीं हूँ. जाने-अनजाने में जो भी आत्म विस्वास होते थे वो भी तुरत खत्म.  ऐसा लगता था आने वाला कल मेरे लिए नहीं आएगा अब.

 

दिन गुजरते गए… मेरे अच्छे बने रहने की मानसिकता मुझसे ग़ुलामी कराता रहा.

 

परिणाम – लोगों के ताने… मेरे अच्छे बने रहने को, लोगों का मेरी बेवकूफी समझना.

 

एक दिन चिढ कर, अपनी सभी अच्छाई को ताक पे रख कर, सोचने लगा कि कैसा लगता होगा जब कोई बकवास करें और मैं अपने दृढ विस्वास के बदौलत उसकी बोलती बंद कर दूँ और कहूं ‘चल निकल ले यहाँ से’.

अगर ऐसी मानसिकता रखूं ‘जिसे जो सोचना है सोचे, जिसे जो बकना है बके, अपने को क्या फर्क पड़ता है !’

विस्वास कीजिये, ऐसी सोंच मन में आते ही एक गजब का चमत्कार हुआ. लगा मेरे ग़ुलामी के सारे जंजीर टूट गए. अजीब सी आज़ादी का एहसास होने लगा.

मुझे महसूस होने लगा कि दूसरों के बकवास का असर मैं खुद पे क्यों होने दूँ ! इस पूरे विश्व में केवल एक ही व्यक्ति है जिसकी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण है, और यह कोई और नहीं ‘मैं’ हूँ और सिर्फ मैं ही हूँ.

मेरी मानसिकता बदलते ही मेरी दुनियां बदल गयी.

मेरा विस्वास कीजिये, अपने गुजरे हुए अनुभव से कह रहा हूँ. इस पूरे ब्रह्माण्ड में केवल एक ही व्यक्ति है जिसे आपके सुख-दुःख की परवाह है, और वह व्यक्ति आप है.

केवल एक ही व्यक्ति है जिसकी सबसे ज्यादा देखभाल करने की आवश्यकता है, आपने सही अनुमान लगाया –  यह आप ही है.

बस यह याद रखें: यदि आप किसी की बहुत अधिक परवाह करते हैं, तो वही इंसान आपकी कम परवाह करेगा… आप जिसके लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे,  वही आपके लिए बहुत व्यस्त रहेगा. और अपनी गलती मानने के बजाये वो आपको इंतजार कराएगा, आपको ये एहसास कराते हुए की उसका समय आपके समय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.

शुरू के कुछ दिनों तक तो आप अपने चारों ओर से प्रतिरोध का सामना करेंगे, जब आप उन लम्बे पुराने आदतों में परिवर्तन करना शुरू करेंगे, लेकिन यह ठीक है. ऐसे लोगों की परवाह किये बगैर आप मजे लो. उनके चेहरे की रंगत देखना… आपके आत्म-विस्वास को देखकर उन्हें खुद पर विस्वास नहीं होगा.

 

आपके लिए जो ठीक है वही करें, अपना निर्णय खुद ही लेने की खुद में साहस डालें, इसके परिणाम विपरीत हो सकते हैं इसके लिए भी खुद को ऐसे विपरीत परिणाम से निपटने का भी साहस रखें.

अपने अकेलापन को भी एन्जॉय करना सीखें. कभी-कभी खुद को खुद के ही साथ रहने दें. खुद को समझे. पता लगाएं कि आपकी ज़रूरतें और इच्छाएं क्या हैं और फिर उन्हें पूरा करने में लग जाएँ. कभी-कभी स्वार्थी भी बनें. आप पर इससे पहले कई बार आपके स्वार्थी होने का आरोप लगाया गया होगा, अब आपके लिए यह दिखाने का समय है कि आप कितने स्वार्थी हो सकते हैं ! उन्हें दिखाएं कि आप खुद से मतलब रखना पसंद करते हैं.

अपनी कमियों को त्याग दें. पूरी तरह से.

अपनी कमियों से मुक्त होने का अब समय आ गया है क्योंकि आप को खुद पे विस्वास होने लगा है.

खुद के लिए खुद का नंबर १ बने.

बोल्ड बनें.

अपने स्वभाव को नेचुरल रखें.

कभी ना भूले की आप ‘आप’  हैं… भले ही परिस्थिति कैसी हो या लोग कैसे भी हों.

समय आ चूका है… अब आप खुद से प्यार शुरू करें… और मस्त रहें. बिंदास रहें.

चियर्स !

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