शादी का डर

भारतीय संस्कृति का अनुसरण करें तो ऐसा लगता है की शादी महज़ एक रीती-रिवाज़ ही नहीं बल्कि दो आत्माओं का भव्य मिलन है. कहीं पर यह किसी के लिए सात जन्मों का बंधन है, तो कहीं पर जी का जंजाल. बदलते जमाने के साथ लोगों का सोंच बदलना भी उचित है, ऐसे में रिश्‍ते को देखने के नजरिया भी बदल गया, लेकिन जब बात शादी की हो तो भारतीय लड़कियां अब भी इस रिश्ते से डरे सहमे हैं.

शादी से भयभीत होने का कारण :

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कल्पना कीजिये आपको अपने परिवार से अलग एक नए परिवार में कई बंदिशें और जिम्मेदारियों को ढोते हुए, अपनी सभी कमियों या आदतों को लगाम में रखते हुए अजनबी लोगों का पूरा ध्यान रखना होगा. जहाँ जोर से हंसना या बोलना सिर्फ आपके लिए एक जुर्म की श्रेणी में आता है, घर के बाकी सदस्यों के लिए सब जायज है.

कैसा लगा आपको आपकी कल्पना ?

है न भयानक !

शादी एक ऐसा रिश्ता है जहाँ मां-बाप बदलते हैं, रिश्तेदार बदलते हैं, दोस्त बदलते हैं, सबकुछ बदल जाता है… बदकिस्मती से अगर रिस्ता मूर्खों के घर हुई हो तो बात ही क्या है – फिर तो आपकी करियर को आप तिलांजलि देदें. अब ऐसे में किसी भी लड़की शादी के नाम से डरना तो स्वाभाविक है. शादी किसी के लिए फैंटेसी होती है तो किसी के लिए बर्बादी. लेकिन लड़कियों के लिए शादी अब भी जिम्मेदारियों का बोझ और पाबंदियों का एक बड़ा गट्ठर है. शादी के बाद लड़कियों को सामाजिक और आर्थिक, दोनों तरह की स्वतंत्रता की तीलांजलि देनी पड़ती है. इन्हीं के साथ अन्य कई जाने-अनजाने समस्याएं हैं जिनके वजह से लड़कियों में शादी के नाम पर डर होता है.

करियर की बर्वादी :

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आज-कल शिक्षा और करियर हर युवा की प्राथमिकता है. इनमें से कई अति महत्वाकांक्षी और वर्कहोलिक क़िस्म के होते हैं. उनके लिए करियर बनना और जीवन में एक मुक़ाम हासिल करना शादी-ब्याह, बीवी-बच्चे से कहीं बढ़कर होता है. उन्हें यह डर बराबर सताता रहता है कि कहीं शादी के बाद अन्य ज़िम्मेदरियों और पूरा करते-करते करियर में वे कहीं बहुत पीछे न छूट जाएं. ऐसे लोगों के लिए उनका करियर, जॉब और क़ामयाबी ही सब कुछ होती है. लड़कियों के लिए शादी और करियर का एक साथ चलना भी एक लक की बात है.लड़कियों को अब भी शादी या करियर में से एक चुनना पड़ता है.  करियर छोड़ने का डर, शादी ना करने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है, क्योंकि करियर छोड़ना मतलब आर्थिक तौर पर किसी और के ऊपर निर्भर होना.

जीवन साथी का सही चुनाव :

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लड़कियों के मन में यह भी एक डर होता है की जिससे उसकी शादी हो रही है वह केवल उसके दहेज़ के रूप में दिए जा रहे पैसे के कारण तो नहीं. हालांकि लड़के भी चाहते हैं कि उन्हें पसंद किया जाए तो उन के स्वभाव या व्यक्तित्व को पसंद किया जाए न कि उन के ओहदे और कमाई को देख कर आप उन्हें पसंद करें. हालांकि वे आप को रिझाने के लिए अपने पैसे और ओहदे का इस्तेमाल कर रहे होते हैं.

प्राइवेसी और फ्रीडम के ख़त्म होने का डर :

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यह बहुत बड़ा डर है, जो युवाओं को शादी करने से रोकता है. शादी से पहले हमारी बहुत सारी बातें और चीज़ें ऐसी रहती हैं, जो केवल हम तक ही सीमित रहती हैं, उसमें किसी की दख़लअंदाज़ी बिल्कुल भी नहीं रहती. लेकिन शादी के बाद स्थिति बिल्कुल उलट हो जाती है. कहां जा रही हो, वो कौन था, ये कौन है, कब तक आओगी,… आदि कई सारे सवालों की झड़ी शादी के बाद लग जाती है.

अकेलापन :

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लड़की शादी इसलिए करती हैं ताकि उसे जिंदगीभर का साथ मिल सके. ससुराल में उसके लिए सब अंजान होते हैं. इसी बीच अगर पति भी पत्नी का साथ न दें तो वह अकेली पड़ जाती है. इस बात की चिंता उसे हर समय परेशान करती रहती है.

सेक्स का डर :

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हम चाहे जितने मॉडर्न हो जाएं, पर आज भी सेक्स को लेकर हमारे मन में डर और भ्रांतियां ज्यों की त्यों बनी हुई हैं. कई बार दोस्तों की बातें, आधी-अधूरी नॉलेज भी सेक्स को लेकर ग़लतफ़हमियां पैदा कर देती हैं. पार्टनर को संतुष्ट न कर पाने का डर, उसकी इच्छाओं को पूरी न कर पाने का भय आदि शंका-आशंकाएं बनी रहती हैं.

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  1. hindipasta says:

    Nice Share👌

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