ये न होने दें…

जिंदगी जीने के लिए सचमुच बहुत पेंचीदा है. हर कवी ने इसे नयी परिभाषा दी है. अपने-अपने भावनाओं के अनुसार किसी ने इसे हसीन मेहबूबा कहा, किसी ने बेवफा, किसी ने पहेली तो किसी ने सुहाना सफर.

एक इग्लिश पोएट की कविता मैंने कभी पढ़ी थी, कवी ने अपनी कविता प्रसिद्ध और विशिष्ट लोगों के लिए समर्पित किया था. उसकी कविता काफी प्रसिद्ध और समृद्ध हुई थी. कवी रातों-रात स्टार बन चूका था. इस वजह से वह अभिमानी और स्वार्थी भी होने लगा था. घर में अपने पत्नी से वो कभी ना प्यार से बात करता था ना ही कभी उसके किसी भी काम के लिए कोई प्रशंसा. जब तक उसकी पत्नी जिन्दा रही वो सिर्फ उसकी आलोचना और उसके हर काम में नुश्क निकालता रहा. उसकी सुबह की शुरुआत अपने पत्नी पर चीखने – चिल्लाने से ही होती थी. हर बात में ताने और भद्दापन उसके लिये आम बात थी.

अचानक एक दिन उसकी पत्नी मर गयी.

कवि बहुत दुखी और पीड़ित रहने लगा.

उसे अपने किये पर बहुत अफ़सोस होने लगा.

वह शर्मिंदा था कि कभी एक कविता उसकी प्रशंसा में लिखना तो क्या,कभी उसने उससे प्यार से बात तक नहीं की.

“काश मुझे पता होता कि वो इतनी जल्दी मुझे छोड़कर चली जायेगी” अपने शोक में हर पल अब वो यही दोहराता भटकता रहा “काश मुझे पता होता कि वो इतनी जल्दी मुझे छोड़कर चली जायेगी”

वास्तव में जिंदगी जीने के लिए बहुत छोटी है. क्यों न अपने सोच को हम बड़ा रखें… इस छोटी सी जिंदगी के हर पल – हर लम्हा को प्रशंसा और प्रोत्साहन के साथ खूब जिए… !

अपने प्रियजनों को उन सभी के लिए शुक्रिया अदा करने का मौका नहीं छोड़ें जो वे हैं और आपके लिए करते हैं.

उन्हें अपने ध्यान, देखभाल, चिंता और प्यार देने में अपने क्षण बिताएं. बहुत मज़ा आएगा.

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