THREESOME

एक फिल्म आयी थी LOVE एक फ्रेंच फिल्म 2015 में.  फिल्म क़े सभी सेक्सुअल सीन सच थे, सही में फिल्माए गए थे. यह फिल्म एक अमेरिकन सिनेमा स्कूल के छात्र, मर्फी नाम की, और उसकी फ्रांसीसी प्रेमिका इलेक्ट्रा के जीवन के चारों ओर घूमती है. एक दिन, मर्फी और इलेक्ट्रा एक ओमी नाम की महिला से मिलते हैं, और अपने सेक्सुअल लाइफ में कुछ उत्तेजना लाने के लिए दोनों ओमी के साथ थ्रीसम करते हैं. जो तीनों क़े लिए एक आनंददायक अनुभव रहा. लेकिन बाद में एक दिन  मर्फी, ओमी के साथ इलेक्ट्ररा की पीठ के पीछे सेक्स करता है, जिसके परिणामस्वरूप ओमी प्रेग्नेंट हो जाती है. इस अनचाहे प्रेगनेंसी ने मर्फी और इलेक्ट्रा के बीच के संबंध को बहुत दुखद मोड़ पर समाप्त कर देता है, और फिर मर्फी को मजबूरन ओमी से शादी करना परता है.

LOVE 2

फिर एक दिन मर्फी जो अब पेरिस के एक छोटे से फ्लैट में ओमी और अपने १८ महीने बेटे के साथ रह रहा है, के पास एक कॉल आता है. कॉल इलेक्ट्रा की माँ की होती है जो बताती है कि उसे इलेक्ट्रा कि एक सहेली मिलि है जिसने उसे बताया कि इलेक्ट्रा ने आत्महत्या कर लिया है.

 

तो यह कहानी महज एक फिल्म की है. जब भी इस फिल्म की कहानी मुझे याद आती है, सच पूछिए मैं काँप जाता हूँ. आजकल थ्रीसम हमारे देश में भी काफी प्रचलित होने लगा है, खासकर शहरों में. क्या है कि हमारे यहाँ शादियों को जीवन भर निभाए जाते हैं. ये बात और है कि कोई रो के या कोई हंस के. जो लोग रो के निभाते हैं वे खुद को मजबूर और असहाय महसूस करते हैं कि भैया जब घंटी बंध गयी तो निकाल नहीं सकते. सामाजिक मान – मर्यादा को मैंटेन रखने के लिए ये कुर्बानी देने होते हैं, मन मार के. अगर मैरिड लाइफ से बच्चे हैं, तो अब खुद के सभी डिजायर्स और फैंटसी को मुंगेरी लाल के सपनो तक ही सिमित रखने पर मजबूर रहते हैं. करे भी क्या !

शादी के उम्र भर निभाने के रिवाज में जो लोग खुश रहते हैं वे, धार्मिक स्वाभाव के होते हैं. जिनके लिए इच्छा होने पर भी,दूसरे किसी महिला को देखना पाप होता है.और ये गलत है भी कि कोई किसी महिला को अश्लील नजरों से देखे. वैसे कुछ लोगों क़े लॉजिक हैं कि ‘खूबसूरती देखने के लिए होती है.’ कोई कहता हैं ‘किसी महिला को देखने से, अगर उसका आत्मसम्मान बाधित नहीं होता हैं तो देखने में कोई बुराई नहीं.’

ये बाते हैं जिन्हे हम आये दिन, देखते और सुनते हैं अपने व्यबहारिक जिंदगी में. इसमें क्या गलत और क्या सही इसका निर्णय लेना मेरे लिए संभव नहीं. क्योकि ये हमारे आधुनिक समाज का एक धीरे-धीरे हिस्सा बनता जा रहा हैं. सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि ऐसे ख़यालात लोगों क़े मन में आते भी हैं तो कैसे !

क्या ये लोग अपने लाइफ पार्टनर से प्यार नहीं करते ?

क्या लोगों में सेक्स क़े लिए सिर्फ एक खूबसूरत शरीर का मिलना ही काफी होता हैं ?

क्या कपड़ों क़े तरह हमारे पार्टनर का शरीर भी पुराने होने लगते हैं, और हमारा मन उस शरीर से ऊब चूका होता हैं ?

क्या दिलको कोई और भा जाता हैं ?

क्या ये पोर्न फिल्मों का असर हैं ?

 

ऐसे कई सवाल मेरे मन में आते रहते हैं. सवालों क़े जवाब ढूंढता हूँ तो सभी सहीं लगते हैं. अलग – अलग मानसिकताओं क़े अपने-अपने विचार हैं.

 

ऑफिस में हूँ, अब घर जाने दीजिये नहीं तो पत्नीजी समझेंगी कि मैं भी थ्रीसम कि तैयारी कर रहा हूँ. अगली बार डिस्कश करेंगे इस पर. आप भी सोचिये…

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