पेंटर और पेंटिंग

एक प्रतिष्ठित चित्रकार था जिसके पेंटिंग्स को अमीर कला संग्राहकों द्वारा ऊँचे दाम में खरीदे जाते थे. एक दिन, किसी ने उसके स्टूडियो से उसकी एक लेटेस्ट पेंटिंग चुरा ली. पेंटर को, एक मंहगी पेंटिंग चोरी होने के बाद भी उसे बिलकुल भी दुःख नहीं हुआ. जब उसके दोस्त अगले दिन अफ़सोस व्यक्त करने के लिए आए, तो उन्होंने देखा कि पेंटर आज भी हमेशा की तरह अपने गार्डन में आराम कर रहा है.

“आप इतने शांत और निश्चिंत कैसे हो सकते हैं?” उन्होंने उससे पूछा “आपका पेंटिंग चोरी हो गया, वह भी कोई मामूली नहीं था, उस पेंटिंग से शायद आपको एक मिलियन डॉलर तक मिल सकते थे!”

“वो पेंटिंग तुम्हारे लिए तो एक संपत्ति के समान था,” उसके बैंकर दोस्त ने कहा.

 

“ऐसा कुछ भी नहीं है,” पेंटर कहा. “मेरी एक पेंटिंग चोरी हुई है. लेकिन वो मेरी संपत्ति नहीं थी.

 

मेरी असली संपत्ति तो ये है!” अपने सिर पर इशारा किया. “यह मेरी असली संपत्ति है, जिसके मदद से मैं पेंटिंग्स बनाता हूँ. और ऐसे बहुत से पेंटिंग्स अभी बाकी है जिन्हे बन कर तैयार होना है.”

 

साथियों, सच है न ये!

पॉजिटिव ऐटिटूड ही सबसे बड़ी संपत्ति है.

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