गुस्सैल बच्चों को ऐसे संभालें

आज एक न्यूज़ चैनल पर दिखा रहे थे कि एक बच्चा रेलवे लाइन पर आत्म हत्या करने गया था, महज इसलिए कि उसके पिता ने उसे मोबाइल पर गेम खेलने के लिए मना किया था.

क्यों ?

बच्चों को क्यों गुस्सा आता है ?

गुस्सा भी इतना कि आत्महत्या तक की नौबत आ जाती है.

वैसे गुस्सा किसी के लिए भी ठीक नहीं. बड़े हो या बच्चे. क्योंकि गुस्सा किसी की भी अच्छी या पॉजिटिव सोच को लगभग समाप्त कर देता है. गुस्सा अपने आप में एक नेगेटिव फीलिंग्स है और नेगेटिविटी हमेशा अपराध, आक्रोष, ईर्ष्या आदि का मुख्य वजह है.

है न !

घर में अक्सर हम देखते हैं कि बच्चे बात-बात पर हाथ उठा देते हैं, चांटा मारने लगते हैं या फिर घर में तोड़-फोड़ करने लगते हैं. बच्चों में गुस्सा इतना बढ़ गया हैं कि पेरेंट्स के लिए उन्हें संभाल पाना बहुत मुश्किल हो जाता हैं और काफी परेशान हो जाते हैं. खासकर बच्चों को गुस्सा तब आता है जब उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती है, ऐसे में बच्चों को शांत करने के लिए पेरेंट्स उनकी सभी मांगों को पूरी करने लगते हैं, जिससे बच्चे जिद्दी होने लगते हैं.

मानता हुँ, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चों की देख-रेख एक मुश्किल काम हैं खासतौर पर अगर पेरेंट्स वर्किंग हो तो. एेसे पेरेंट्स को बच्चे की परवरिश करनें में सचमुच बहुत मुश्किल अाती है. पेरेंट्स का वर्किंग होने की वजह से बच्चो पर ध्यान कम जाता है.

पहले तो हमें समझने की जरुरत है कि छोटी सी उम्र में इतना अधिक गुस्सा के वजह क्या हो सकते हैं ?

आजकल बच्चों से हमें उम्मीदें बढ़ गयी हैं. अच्छे मार्क्स चाहिए… बच्चे की अच्छी करियर चाहिए. इसके वजह से बच्चों को स्कूल, ट्यूशन और घर के स्कूल को एकसाथ अटेंड करने होते हैं. जिसके वजह से नींद कम लेते हैं, उन के खाने की रूटीन फिक्स नहीं होते, जिस के वजह से झल्लाहट और गुस्सा आना स्वाभाविक है. इस के अलावा अगर बच्चा कम मार्क्स लाए, फेल हो जाए या स्कूल में उसे शिक्षकों के डाँट या ताने मिले. नतीजा क्या होता है ? वे डिप्रैशन के शिकार जाते हैं. दूसरे बच्चों से मारपीट करने लगते हैं, या फिर हमेशा आक्रोशित रहने लगते हैं. ऐसी परिस्थिति में पेरेंट्स को बहुत समझदारी से अपने बच्चों को संभालना होगा.

सबसे पहले तो पेरेंट्स को अपने खुद के गुस्से को कण्ट्रोल करना होगा, और बच्चों के सामने तो बिलकुल अपने गुस्से को प्रदर्शित न करें. बच्चों को कभी भी किसी भी तरह के हिंसा वाली कोई भी प्रोग्राम देखने से रोकें. बात – बात पर गुस्सा करने वाले लोगों से भी बच्चों को दूर रखना होगा. ध्यान रखने की जरूरत है कि बच्चे बहुत जल्दी किसी भी चीज को कॉपी करते हैं.  बच्चों से बात करते वक्त उनके आत्म सम्मान का ध्यान जरूर रखें. पेरेंट्स अक्सर बच्चों के गुस्सैल रवैये से तंग आकर उन्हें मारने-पीटने लगते हैं या चीखने-चिल्लाने लगते हैं – बिल्कुल भी नहीं… ऐसा तो कभी न करें. अगर आप ऐसा कर रहें हैं तो निश्चित रूप से बच्चे को उग्रता की तरफ आप प्रेरित कर रहे हैं. उग्रता में और भी अधिक गुस्सा होंगे और जिससे आपकी परेशानी खत्म होने की बजाय और बढ़ जाएंगी.

आप ध्यान देना, जो पेरेंट्स बच्चों की बात सुनते हैं,उन्हें समझते हैं, उन बच्चों को गुस्सा कम आता है. बदलते उम्र के साथ बच्चों में मानसिक और शारीरिक बदलाव आने लगते हैं. उस बदलाव को पेरेंट्स के लिए समझना आवश्यक है. अगर हम अपने बच्चों की भावनाओं को समझेंगे तो बच्चे हमारे करीब होंगे और इस तरह से उन्हें हम पर भी भरोसा होगा, फिर हमारी बातों को भी समझेंगे. हमें बच्चों की नींद का भी उतना ही ध्यान रखना होगा, जितना उनके करियर का रखते हैं. जिन बच्चों की नींद पूरी होती है उन में गुस्सा कम होता है. हम भूल जाते हैं कि बच्चे होते ही चंचल हैं, उनका स्वभाव ऐसा ही होता है. उन्हें जैसे समझाएगे, वे वैसा ही समझेंगे. हमें ये नहीं देखना है कि बच्चे गुस्सा कर रहे हैं, बल्कि हमें ये समझना होगा कि बच्चे गुस्सा क्यों कर रहे हैं. गुस्सा के पीछे कि वजह, मानसिकता को समझे. समस्या दूर. कुछ दिन ऐसा करके तो देखिये.

 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s