अपने बच्चों को सोशल मीडिया में कैसे सुरक्षित रखें

एक किशोरावस्था की देखभाल करना, उसे स्वतंत्र और जिम्मेदार वयस्क बनना कोई छोटा काम नहीं है. अपने किशोरावस्था बच्चे के मार्गदर्शन में मदद करने के लिए आपको आवश्यक पेरेंटिंग टिप्स को समझना जरूरी है.

यौवनावस्था में होते बदलाव, किशोरों और माता-पिता के लिए समान रूप से एक कन्फ्यूजिंग समय हो सकता है.

सबसे पहले तो आपको ध्यान रखना होगा कि ये जमाना अब गिल्ली डंडा या कबड्डी का नहीं रहा, इसलिए अपने जमाने से अपने बच्चे की तुलना तो बिल्कुल ही ना करें. आपको भी अब उन तकनीकों के बारे में जानना होगा जो आपके बच्चे या किशोर जिसका प्रयोग कर रहे हैं. क्योंकि आप उन्हें इन चीजों से अलग नहीं रख सकते. क्योंकि अलग रखने का मतलब होगा उन्हें उनके जमाने से दूर करना.

अपने बच्चों से पूछें कि वे ऑनलाइन फ्रेंड्स के साथ कैसे संपर्क करते हैं, उन्हें बताएं कि आप इसके बारे में जानने के इच्छुक हैं और रुचि रखते हैं.

जब भी बच्चे कंप्यूटर पर बैठे हो आपकी नज़रों में हो तो बेहतर है. इसलिए कंप्यूटर को घर के कॉमन जगह पर रखें. ऑनलाइन कनेक्टिविटी के लिए एक निश्चित समय रखें जिस वक्त बच्चों के साथ आप भी समय निकाल सकते हैं.

स्मार्ट फ़ोन उपयोग की भी सीमा निर्धारित करें. इसका बेहतर तरीका तो ये है कि समय का निर्धारण खुद ना करते हुए अपने टीनएज से ही पूछे कि उनके डेली रूटीन से कौन सा वक्त सही होगा ऑनलाइन होने के लिए. ध्यान रखना जरूरी है कि ‘पूछना’ और ‘कहना’ दोनों में फर्क है. आपका उनसे ही पूछना उचित होगा, कहने के बजाये.

अपने बच्चों और किशोरों से उन लोगों के विषय में पूछें जिनसे वे ऑनलाइन “मिलते हैं”. यहाँ भी ध्यान देने की जरूरत है, उनसे उनके पेरेंट्स बनकर नहीं बल्कि उनका सबसे अच्छा दोस्त बनकर पूछें. वास्तविक रुचि दिखाने से उन्हें इसके बारे में बात करना सहज महसूस होगा.

चर्चा करें कि ऑनलाइन पोस्ट करने के लिए क्या ठीक है और सुरक्षित है और क्या नहीं है.

बच्चो को समझाए कि ऑनलाइन फ्रेंड्स अक्सर वही नहीं होते जो अपने विषय में अपने प्रोफाइल में अपनी जानकारी देते हैं. इसलिए अपने घर के किसी भी महत्वपूर्ण बातों को ऑनलाइन फ्रेंड्स से कभी शेयर ना करें, और ना ही कभी उनसे अकेले मिलने जाए. अगर बच्चों को लगता है कि किसी से मिलना जरूरी भी है तो आप कभी अकेले जाने की अनुमति ना दे. हां, रोके बिल्कुल भी नहीं, क्योंकि आपके रोकने से शायद वे नहीं रुकेंगे और फिर आपसे छुप कर मिलेंगे जो और भी घातक हो सकता है.

अगर आपका बच्चा या किशोर ऑनलाइन गेम्स खेल रहे हैं, तो आप भी उनमें शामिल हों ताकि आप देख सकें कि वे क्या कर रहे हैं और इसके बारे में उनसे बात करें. हो सकता है ये सब चीजें आपको इंटरेस्टिंग ना लगे, फिर भी आप उन्हें देखें. मानता हूँ आपका फेवरेट टीवी सीरियल छूट रहा है. छूटने दीजिये.

अब जिंदगी जो हम – आप जी रहें हैं. वो अब हमारी कहाँ रही ? हम तो अपने बच्चों के लिए ही जी रहें हैं न!

 

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