डर का इलाज – इन बातों से क्यों डरती हैं महिलाएं ?

महिलाओं में एक अज्ञात डर हमेशा होता है. खासकर पुरुषों के मामले में महिलाएं अक्सर अनेक डरों से जूझती हैं. शादी के बाद पति के रूप में नए जीवन साथी का मिलना. पति चाहे जैसा भी है, उसके साथ खुद को एडजस्ट करना. ऐसी ही कुछ बातें हैं जो महिलाओं को हमेशा सताती रहती है.

रिजेक्शन का डर

महिलाओं में रिजेक्शन का डर बहुत गहरा डर है. उन्हें लगता है कि यदि वह खूबसूरत नहीं दिखेंगी तो उन्हें कोई पसंद नहीं करेगा. शादी के बाद भी महिला के मन में यह डर रहता है कि कुछ वर्ष गुज़र जाने के बाद उसका पति उसे चाहेगा या नहीं. कहीं उसके पति का उससे मन भर गया तब क्या होगा ? प्रेगनेंसी, उसके बाद डिलीवरी, फिर मोटापा. उसके बाद तो वह भद्दी दिखने लगेगी. क्या उसका पति उसकी  तरफ आकर्षित रहेगा ? कहीं वह उसे नापसंद तो नहीं करने लगेगा!

यह भी पढ़ें  – रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए इन से बचें

स्वास्थ्य बिगड़ने का डर

महिलायें स्वास्थ्य को लेकर हमेशा गंभीर रहती हैं. उन्हें इस बात की फिक्र हमेशा बनी रहती है कि  उनके घर में किसी की सेहत ना बिगड़ जाए. अपने परिवार की सेहत को लेकर वे हमेशा फिक्रमंद रहती हैं. बढ़ते प्रदूषण और हिंसा को लेकर इस तरह की चिंता का होना स्वाभाविक भी है.

यह भी पढ़ें  – Happy Marriage के लिए एक ही महिला से 4 शादियां

आत्म सम्मान का डर

महिलाओं में अपने आत्म सम्मान को लेकर हमेशा एक भय होता है. हमारे सामज की दकियानूसी सोच महिलाओं के प्रति जो विचार रखती है, उससे लगभग सभी महिलायें प्रभावित होती हैं. पुरुष प्रधान वाले समाज में महिलाओं का कब मजाक उड़ा दिया जाए, उनपर कब क्या इल्जाम लगा दिए जाए, इसका कोई भरोसा नहीं होता.

यह भी पढ़ें  – Perfect Life Partner बनने के आसान tricks

जिंदगी में अकेलापन का डर

महिलायें जिस घर में जन्म लेती हैं, वह उनका मायका कहलाता है. शादी के बाद जिस घर में जाती है, वह घर उनका ससुराल कहलाता है. अब कोई बताएगा कि उनका घर कहाँ है ? ससुराल वाले परेशान करेंगे तो मायके जायेगी. मायके वालों का प्रवचन होता है कि ‘जिस घर में डोली जाती है, उसी घर से अर्थी उठनी चाहिए’, वाह रे दो मुंहे समाज. समाज की इस दोगली नीति की वजह से महिलाओं में अकेलेपन का खौफ होता है.

यह भी पढ़ें  – Happy married life के लिए wife को ऐसे खुश रखें

विश्वास खोने का डर

शादी से पहले मायके वालों को यकीन दिलाते रहो कि जिस लड़के से वह बात कर रही थी वह सिर्फ उसके साथ पढता है, इससे ज्यादा और कुछ नहीं हैं उनमे क्योंकि पेरेंट्स के ज़रा से शक होने का मतलब है फ्रीडम से आजादी. शादी के बाद ससुराल वालों की छोटी – छोटी  भावनाओं का ख्याल रखना, नहीं तो बात का बतंगड़ बनने में वक्त नहीं लगेगा और अपने ही घर में शक के दायरे में रहने वाली एक कामवाली बाई की तरह जिंदगी गुजारनी पड़ सकती हैं. इसलिए महिलायें इस तरह की परिस्थितियों से हमेशा बचना चाहती है.

यह भी पढ़ें  – Gender equality लैंगिक समानता जितनी अधिक उतना ही सेक्स

डर को डराएं

महिलाओं को चाहिए कि वो हमेशा याद रखें कि ये इक्कीसवी शताब्दी है. वो जमाने गए जब उन्हें पुरुषों पर आश्रित रहना पड़ता था. आज की महिलायें हमेशा इस सच्चाई को याद रखें कि वह आज की महिलायें हैं, और आज की महिला अबला नारी नहीं बल्कि एक आत्म निर्भर और काम-काजी महिला है. इस सच को स्वीकार कर लें कि वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति में काफी बदलाव आए हैं, इसलिए पुरुष-प्रधान मानसिकता से पीड़ित ना होकर, अपनी शक्ति को पहचानें और अपने अंदर बैठे डर को डराएं.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s